Wednesday, 5 April 2017

समग्र सामाजिक समझ की ओर,
जिसके अंतर्गत राजनीति, अर्थव्यवस्था तथा धर्म आदि सभी आते हैं।

प्रमुख विषय
सामाजिक पहचान , सम्बन्ध और व्यवस्था
1.       व्यक्ति-परिवार के बीच सम्बन्ध के विभिन्न प्रकार
2.       समाज, राज्य और बाज़ार का मिश्रित स्वरुप
3.       भारतीय समाज के मूलभूत अवयव
4.       सामाजिक पहचान के दायरे
1)      जाति
2)      क्षेत्र
3)      भाषा
4)      भूगोल
5)      धर्म , मजहब
6)      शिक्षा
7)      मनोरंजन
8)      कला
9)      सम्पन्नता
10)   संप्रदाय, गोत्रकुल, खाप, कबीला आदि
11)    
12)   लिंग
व्यक्तिगत पहचान के दायरे
1)      योग्यता
2)      कार्य
3)      अनुभव
4)      विद्या
5)      राजकीय संस्थान
6)      सम्पन्नता
7)      पहनावा
8)      दर्शन
9)      शिक्षा
5.       वर्ण बनाम जाति व्यवस्था
6.       विभिन्न विचार के सामाजिक मॉडल
7.       विचारों का पारस्परिक संघर्ष (सत्ता बन्दूक से आती है...कम्युनिज्म)
8.       वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था का संघर्ष और समाज द्वारा निकाले गए उपाय
भारतीय राजनीति के मूल सन्दर्भ
9.       भारत में राज्य का विकास
10.   भारतीय अर्थशास्त्र का उद्भव और विकास
11.   भारतीय मुद्रा और करेंसी का उद्भव और विकास
12.   राष्ट्र का विकास
13.   सत्ता के शक्ति विभाजन में जांच और संतुलन के सिद्धांत
14.   भारतीय समाज में संपत्ति, मिल्कियत, कर और शुल्क का उद्भव और विकास
15.   आधुनिकता, परंपरा और सुधार की बुनियादी अवधारणा
16.   युद्ध व्यवस्था और हारे हुए का अधिकार (ह्यूमन राइट्स)
17.   पारस्परिक संघर्ष और समाधान
18.   सामुदायिक स्वास्थ्य का विचार और उसका उद्भव
19.   संसार संरचना में मत-मतान्तर
20.   काल और अंतरिक्ष के सापेक्ष मनुष्य का सम्बन्ध
21.   मापन और मानक
22.   गुलामी का असर
a.       मतिभ्रम पैदा करने के औपनिवेशिक षड़यंत्र
b.      पैंतरेबाजी




संवाद और आन्दोलन के भारतीय उपाय
23.   ध्वनि सिद्धांत
24.   शब्द सिद्धांत
25.   वाक्य सिद्धांत
26.   कथा के प्रकार
27.   न्यायशास्त्र के मूलभूत सिद्धांत
28.   वैदिक, बौद्ध और जैन परंपरा की विधियां
29.   क्षेत्रीयता आंचलिकता और समग्रता
30.   भक्ति आन्दोलन
a.       निर्गुण
b.      सगुण
c.       साकार
d.      निराकार
31.   प्रकृति, प्रतीक, प्रतिनिधि एवं विग्रह के साथ व्यवहार के सिद्धांत
32.   लीला, कथा एवं नाटकीयता के प्रकार तथा मूल सूत्र
33.   आन्विक्षिकी, त्रयी, वार्ता एवं दंडनीति
34.   अन्तराष्ट्रीय व्यवसाय एवं शिल्प, मसाला, दवा, खनिज, सोना और रेशम के माध्यम से
35.   सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया और सक्रियता
36.   रणनीति
37.   मंत्र, यन्त्र और तंत्र के विविध प्रकार
38.   योग एवं तंत्र का अंतर्संबंध
39.   पञ्च परमेष्ठी : जैन तंत्र का सामाजिक निरूपण एवं प्रतिनिधित्व (पञ्च परमेश्वर)
40.   कुल तंत्र, गण तंत्र, राज तंत्र और प्रजा तंत्र
41.   तीर्थ संरचना
42.   मेला लगाना,
43.   लीला मंडली
44.   कथा-पुराण
45.   यात्रा, शास्त्रार्थ, कारवां
46.   मठ-मंदिर विहार का निर्माण तथा उनकी सामाजिक जिम्मेदारियां
47.   प्रत्यक्ष एवं परोक्ष शिक्षण तथा प्रशिक्षण
48.   सहज, सरल लोक शिक्षण हेतु खेल गढ़ना
49.   चित्र, पट-चित्र (थंका), रक्षा सूत्र, मांगलिक आकृतियां, आनुष्ठानिक, विग्रह, निर्माण द्वारा सामाजिक संतुलन
50.   झंडा-पताका
51.   मंडल, नृत्य
52.   श्मशान के आठ प्रकार
53.   भारतीय श्मशान के आठ प्रकार एवं चार अन्य श्मशान
54.   भूमिगत आन्दोलन
55.   संसाधनों की व्यवस्था
56.   वर्तमान कानून के नियंत्रणकारी प्रावधान
57.   फंडिंग एजेंसियों की माया
58.   भारतीय सामाजिक आंदोलनों पर विदेशी नियंत्रण (हिन्दू, मुस्लमान, इसाई)
59.   संन्यास और उससे वापसी
60.   भारतीय आंदोलनों की परंपरा

61.   क्यों असंतोष है (नयी पीढ़ी बनाम पुराणी पीढ़ी): कारण और प्रकार

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