Friday, 7 April 2017

चौराहे पर खड़ी भारतीय मेधा और भू राजनीति

सदियों से सभी महाद्वीपों की प्राचीन संस्कृतियों में पूजाघर, वेधशालाओं और श्मशान सरीखी बड़ी भवन संरचनाओं का निर्माण होता रहा है| इन भवन संरचनाओं की वास्तुकला और भव्यता दर्शाती है कि इन संरचनाओं के निर्माण में उच्चतम  इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता रहा| इस प्रकार के भव्य भवनों की जरुरत का आधार कृषि, जन स्वास्थ्य और समाज कल्याण की नीतियों को स्थापित करने की व्यावहारिक जरुरत रही है न कि सिर्फ राजाओं के शौकिया मिजाज|
भारत के अलावा चीन से जापान तक के एशियन बौद्ध देशों और सारी दुनियां में मौजूद ऐसी ज्यादातर इमारतें आज सिर्फ खण्डहरों के रूप में हैं| इस बर्बादी की कारगुजारियां कम से कम चौथी शताब्दी से जारी हैं| इसके पीछे की सच्चाईयां धार्मिक कट्टरवादियों, नफ़रत के सौदागरों, खानाबदोशों की काली करतूतें बयान करती हैं| अरबी और इसाई जमातों के लिए तो दूसरी धर्म-संस्कृतियों और परम्पराओं की तबाही धर्म प्रसार का औजार तक साबित हुई है| भारतीय सन्दर्भ में ये बात जरुर है कि वर्तमान में यहाँ दुनिया के दूसरे हिस्सों जैसी हिंसात्मक क्रिया प्रतिक्रिया कमतर है|
आज जबकि तलवार के दम पर ऐसे दमन कार्य आसान नहीं रहे तो उन जमातों ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों, लड़ाकू समूहों, इस्लामी कट्टरवादियों, दक्षिणपंथी नफ़रत के सौदागरों, मिशनरियों इत्यादि ने भूमि सुधार, कृषि का आधुनिकीकरण और औद्योगिकीकरण का सहारा लेकर इन भव्य संरचनाओं को बर्बाद करने का काम जारी रखा है| इन लोगों की कोई कारगुजारी काम न आए तो नई निर्माण इंजीनियरिंग से,  आतंकवादी समूहों से, और तो और ये लोग अलगाववादियों को पैदा करने से भी नहीं चूकते हैं|

हाल ही में ऐसी संरचनाओं की श्रंखला मध्य पूर्व, दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, यूरोप भारत और ऑस्ट्रेलिया में खोजी गयी हैं| इन देशों की जमीन और समुद्र की तलहटी में मौजूद इन इमारतों में गौर करने वाली बात है इनकी डिजाइन, निर्माण में प्रयुक्त सामग्री और वास्तुकला जो कि प्राच्य (भारतीय और एशियाई) तर्ज पर है| भारतीय और एशियाई मेधा की कारीगरी को, विज्ञान और वास्तुकला को समझे बिना उसको प्रोत्साहित किये बिना इन इमारतों की  अहमियत को समझ पाना आसान नहीं, ऐसे में पाश्चात्य भाषाओँ में सिर्फ शब्दानुवाद करके पश्चिमी विद्वान तमाम नए तुक्के गढ़ रहे हैं| इस श्रृंखला में हम वैश्वीकरण के चौराहे पर खडी भारतीय विश्वदृष्टि का मूल्यांकन कर करके पूरी दुनिया की राजनीति को देखने के भारतीय नजरिये को सामने रखने का प्रयास करेंगे... 
....अगली किश्तों में जारी

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