बरसाती राष्ट्रभक्ति का दौर शुरू हुए लगभग अब बहुत वर्ष बीत चुके हैं| इस दौर में हमने
कई दोमुहे राष्ट्रभक्त औरउनकी बनावटी राष्ट्रभक्ति देखी| हमने देखा कि मिडिया में जो लोग बैठे है, जिनको आज
के युवावर्ग विद्वान, समझदार और सुलझा हुआ समझती थी, वे भी वास्तव में बिन पेंदे के राष्ट्रभक्त हैं|
उनकी राष्ट्रभक्ति सत्ता और पैसे से संचालित होती है, आत्मा, स्वाभिमान और स्वविवेक से नहीं| हमने देखा कि
कैसे आधुनिक अर्थशास्त्री अर्थ का अनर्थ करते हैं, हमने देखा कि कैसे देश की जनता को मुर्ख बनाया जाता
है| हमने यह भी देखा कि पढ़े-लिखे कहे जाने वाले डिग्रीधारी भी कैसे राष्ट्रभक्ति के नाम पर मूर्ख बनते
और बनाते हैं| हमने यह भी देखा कि कैसे देश को विदेशियों के हाथो गिरवी रखने में देश के नेताओं और
उद्योगपतियों को शर्म नहीं आती और हमने यह भी देखा कि उनके चमचे और चापलूस कैसे अपनी अपनी सेना
बनाकर जनता के बीच घुसकर जनता को गुमराह करती है|
इतना सब देख लिया लेकिन फिर भी हमारी आँखें नहीं खुलीं, इससे अधिक दुर्भाग्य की बात और क्या हो सकती है?
इतिहास में हमने कितनी बार विश्वासघात सहा, कितने कष्ट सहे, कितनी गुलामियाँ सही.. सब भूल गये|
बस याद रहा तो केवल इतना कि किस सम्प्रदाय से नफरत करना है और कैसे धर्म-जाति के नाम पर समाज व राष्ट्र
को बाँटे रखना है| हम भूल गये चाणक्य, चन्द्रगुप्त, विनोबा भावे और महात्मा गाँधी के उस योगदान को
जो उन्होंने राष्ट्र को संगठित करने में दिए| हम भूल गये स्वतंत्रता सेनानियों को जिन्होंने धर्म
और जाति से ऊपर उठकर राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया| हम भूल गये उस
योगदान को जो नानक, कबीर, रामदास, बुद्ध आदि ने दिए इस देश को सांप्रदायिक सौहार्द बनाये रखकर समृद्ध
होने के लिए| हमने उनको ही आधार बना लिया आपस में लड़ने का, नफरत करने का|
तो हमने इतिहास से सार्थक कुछ भी नहीं सीखा और उसका परिणाम यह हुआ कि आज धूर्त और मक्कार लोग
हमारे शुभचिंतक बनकर हमें ही नहीं, हमारी पूंजी भी विदेशियों के हाथो सौंप रहे हैं| हमारे खून पसीने की कमाई
को हमसे ही छीन कर ऐसी जगह रखवा रहे हैं, जहाँ से वे हमे जब चाहें कंगाल बना सकते हैं| उदाहरण के
लिए पेटीएम् या इलेक्ट्रोनिक बैंकिग जिसका संचालन विदेशी कर रहे हैं| अभी हाल ही में खबर पढ़ी कि किसी
शाहदरा के एक व्यक्ति का पूरा पैसा ज़ीरो हो गया पेटीएम् में जब उसने वनटाइम पासवर्ड डाला| अब पुलिस में
शिकायत दर्ज हुई, पुलिस जांच करेगी, फिर कोर्ट में केस जाएगा... उसकी जिन्दगी तो बर्बाद हो जाएगी इस कोर्ट
कचहरी के चक्कर में| सत्रह हज़ार का चुना लगा उसे, लेकिन उसे निकलवाने के लिए पुलिस, वकील और कोर्ट न
जाने कितने का चुना उसे और लगा देंगे|
हम इस पहली धोखाधड़ी की घटना से ही सबक ले लें तो बहुत है, लेकिन मैं जानता हूँ कि जब हमने हजारों
वर्षों में कई बार गुलाम होने के बाद भी सबक नहीं लिया तो अब क्या ख़ाक सबक लेंगे!
फिर आप स्वयं ही सोचिये कि जो सरकार स्वतंत्रता के इतने वर्षो बाद भी कोई भी सार्वजनिक क्षेत्र को नहीं
संभाल पायी, यहाँ तक की बीएसएनएल जैसे सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा ही नहीं संभाल पा रही| जबकि नई नई दूर
संचार की निजी कम्पनियां सफल हो रही हैं, अच्छी से अच्छी सुविधा दे पा रहीं हैं... लेकिन सरकारें
बीएसएनएल से जनता को विश्वसनीय सुविधा नहीं दिला पा रही| हमारी सरकारों से रेलवे तक नहीं
सम्भलता, निरंतर घाटे में जाता रहता है| इनसे अन्न भण्डार नहीं संभालता, लाखों टन अनाज सड़ जाता है...
फिर इनके पास आज तक कोई सरकारी तकनीक ऐसी नहीं है, जिसपर जनता विश्वास कर सके... तो आप
कैसे विश्वास कर सकते हैं कि ये आपका धन जिस इलेक्ट्रोनिक मिडिया के माध्यम से खर्च करवाना चाह रहे
हैं, वह सुरक्षित व विश्वसनीय है ? सरकार का क्या है, आज है कल बदल जाएगी|
तो देशभक्ति का सही अर्थ होता है वह भक्ति जिससे देश व उसके नागरिकों का हित होता हो, न कि किसी
विदेशी कम्पनी का| आपको तो यह भी नहीं पता होता कि कौन सी कम्पनी देशी है और कौन सी विदेशी|
जिओ की जय करने वाले नहीं जानते कि अम्बानी बस इनका चेहरा है असल खिलाडी तो कोई और ही है|
पेटीएम् भी चीनकी ही कम्पनी है| यानि हमारी ही सरकार हमारा ही धन चीन और बकिओं के हवाले करना चाहती है
इलेक्ट्रोनिक माध्यम से| क्या हम इसे देशभक्ति कहेंगे?
फिर राष्ट्रभक्ति तभी सार्थक मानी जायेगी जब देश की सेना और पुलिस प्रजा के प्रति निष्ठावान हो, उत्तरदायी हो|
लेकिन केवल भूमाफियों के इशारों पर ये लोग ग्रामीणों पर लाठियाँ बरसा देते हैं, गोलियाँ चला देते
हैं.. बिलकुल इस प्रकार जैसे वे लोग इंसान नहीं, कोई कीड़े-मकोड़े हैं| तो क्या हम इनको राष्ट्रभक्त कह सकते हैं?
बिलकुल नहीं...!
जो भी व्यक्ति राष्ट्र व उसके नागरिको के प्रति निष्ठावान नहीं है, वह राष्ट्रद्रोही ही कहा जायेगा न कि राष्ट्रभक्त|
फिर वह देश का कितना ही बड़ा धन्नासेठ हो, कितना ही सम्मानित नेता हो, कितना ही बड़ा
सेना या पुलिस का अधिकारी हो, या स्वयं प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति ही क्यों न हो| इनमे से कोई भी
राष्ट्र व राष्ट्र के नागरिकों के हित व सुरक्षा से ऊपर नहीं है| यदि राष्ट्र का धन, राष्ट्र का कृषि, भू व खनिज सम्पदा
सुरक्षित नहीं है, यदि राष्ट्र के नागरिक सुरक्षित नहीं हैं तो उत्तरदायी राष्ट्राध्यक्ष व उसके अधीनस्थ सभी राजकीय
विभाग, मंत्री व अधिकारीगण होते हैं| और यह एक बहुत ही बड़ी जिम्मेदारी होती है|
इसलिए प्रजा यदि अब भी होश में नहीं आएगी, अब भी करण-अर्जुन आएंगे वाला डायलॉग बोलेगी तो फिर से
हमें विदेशियों का गुलाम होने से करण-अर्जुन भी नहीं बचा पाएंगे| यदि हम आज भी नेताओं के बिछाये
जात-पात व धर्म की राजनीती से स्वयं को बाहर करके विशुद्ध भारतीय नहीं बनेंगे, तो हमें न अल्लाह
बचा पायेगा और न ही जय श्री राम|
होश में आइये... मैं जानता हूँ कि आप लोगों की शिक्षा भारतीय पद्धति से नहीं हुई है, इसलिए भारत आपकी माता
नहीं है, आपके मन में भारत के प्रति वह सम्मान नहीं है जो अपनी माँ के प्रति होता है| मैं यह भी जानता
हूँ कि आप में से कई नास्तिक हैं तो कई विदेशी संस्कृति व धर्म से प्रभावित, इसलिए भी भारत के
प्रति संतानोचित अपनत्व नहीं है, विदेशों में सेटल होने का सपना देखते रहते हैं.... लेकिन फिर भी| मेरा सभी से
आग्रह है कि जब तक भारत की भूमि पर हैं, कम से कम तब भारत के प्रति निष्ठावान रहें| जब आपकी नौकरी
लग जाये विदेश में, तब आइयेगा शत्रु बनकर, हम उतने ही प्रेम से आगे बढ़कर आपका स्वागत करेंगे और शत्रुता
निभाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ेगे|
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